देश का पहला त्रिकोणीय ब्लांइड महिला क्रिकेट टूर्नामेंट उत्तराखंड में

देश का पहला त्रिकोणीय ब्लांइड महिला क्रिकेट टूर्नामेंट उत्तराखंड में

सर्मथनम ट्रस्ट फार दि डिसऐबलड बंगलूरू और उत्तराखंड विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान केंद्र-यूसर्क द्वारा संयुक्त रूप से देश की पहली महिला ब्लांइड क्रिकेट त्रिकोणीय श्रृंखला का आयोजन उतराखंड में दिनांक 14 दिसंबर से 16 दिसंबर 2018 तक किया गया। आयोजन के सहभागी वेलहम ब्वाईज स्कूल देहरादून और टिहरी हाइड्रो डवलपमेंट कारपोरेशन रहे।

समुंदरी लहरों पे सवार उड़ीसा ने जीता महिला ब्लांइड क्रिकेट कप

आज उड़ीसा की सुनामी लहरों को रोकने की ताकत दिल्ली की लड़कियां नहीं जुटा पाई। हां देश के पहले त्रिकोणीय महिला ब्लांईड क्रिकेट कप में दिल्ली की टीम को 9 विकेटों से हराकर आखिर उड़ीसा ने अपने 52 घंटों के सफर के बाद देहरादून पहुंचने का मकसद पूरा कर ही लिया। यह लड़कियां पहली बार ट्रेन में सवार हुई थीं। इन्होंने पहली बार देहरादून में ठंड का अहसास किया और पहली बार क्रिकेट खेली पर देहरादून के वेलहम ब्वाॅइज स्कूल की गुनगुनी धूप और प्रिंसीपल डा. गुरनीत बिंद्रा की मेजबानी की गर्माहट ने इनको कहीं से भी ठंड का अहसास नहीं होने दिया। परिणाम हुआ कि उड़ीसा ने अपने खेल और खेल भावना से सबका मन मोहकर पहला राष्ट्रीय कप मानो दिल्ली की टीम से छीन कर इतनी वाहवाही लूटी कि देखने वाले रश्क कर बैठे।

दर्शकों की साफ-साफ सहानुभूति यद्यपि उत्तरी भारत का होने के नाते दिल्ली की तरफ दिख रही थी पर ये छोटी-छोटी उड़िया बालाएं तो मानो किसी की भी परवाह करने के मूड में नहीं थी। उनका ध्यान तो सिर्फ अपनी टीम की बनाई रणनीति पर फोकस था। उनके कान लगे थे अपने कोच देवाशीष जेना द्वारा दिये जा रहे संदेशों पर, जो एक के बाद एक खिलाड़ी के माध्यम से पूरे मैदान में खिलाड़ियों तक हवाई गति से पहुंच रहे थे। टीम का ऐसा तालमेल, गति, लय, चपलता और समन्वय तो शायद हिंदुस्तान की क्रिकेट टीम में भी आपने कभी नहीं देखा हो। आंखों से दुनिया को ना देख पाने वाली ये लड़कियां आज कैसा खेल रही थीं मेरी कलम इसे लिखने में सक्षम नहीं। हां मैं आपको जरूर उलाहना दे सकती हूँ कि आपने ईश्वर की सुंदर सृृष्टि की इन इन चुलबुलाती कृति उड़िया बालाओं का गेंद, बल्ले और रनों के साथ होने वाला उड़िया नृत्य ना देखकर बहुत कुछ खोया है। मुझे तो लगा तीन दिन की रिपोर्टिंग का मौका देकर आयोजकों ने मुझ पर तो उपकार किया क्योंकि मुझे पहली बार अहसास हुआ कि आंखों के होते हुए भी हम कितना देख पा रहे हैं और यह आंखों की ज्योति ना होने के बावजूद भी हमसे कितना आगे का अपनी मन की आंखों और बाॅल की छन्न की आवाज सुनकर मन की अंतरतम आंखों से उस परमपिता परमात्मा के साथ कितना नजदीक से जुड़ी हैं। हां यह सचमुच दिव्यांग हैं उस दिव्य आत्मा का अहसास इन दृष्टिबाधित लड़कियों के हर अंग प्रत्यंग से हो रहा था। उड़ीसा ने सचमुच दिल्ली-दिल्ली की आवाज से भी नर्वस ना होकर अपना लक्ष्य यूं एक रोमांचक मैच में बहुत सलीके, गंभीरता और बिना तनाव में आकर पूरा कियां। यह ब्लांईड किके्रट जरूर है पर ऐसा खेल का ऐसा रोमांच कम ही सामान्य किरकेट में भी देखने को मिलता है।

आज के फाईनल मैच में वेलहम स्कूल के मैदान में दिल्ली की कप्तान गुलशन ने जीतकर पहले बल्लेबाजी का फैसला किया। यह मैच 15-15 ओवर का था। दिल्ली की ओर से कप्तान गुलशन और विनीता ने पारी की शुरूआत कर पहले ओवर में 13 रन बनाए। पर दूसरे ओवर में उनके रनों की गति को सधी गेंदबाजी और फील्डरों ने रोक दिया। दूसरे ओवर में सिर्फ 3 ही रन बनाने देकर उड़िया बालाओं ने दिल्ली को दबाव में लाने की रणनीति अपनाई। तीसरे ओवर में टूर्नामेंट का पहला बी1 केटगिरी का चैका विनीता ने मारा। बी1 केटगिरी का तात्पर्य है शत प्रतिशत ब्लाइंड। इस केटेगिरी के खिलाड़ियों को 1 के बदले 2 रन मिलते हैं तो चौके के बदले विनीता को 8 रन मिले। विनीता के तौर पर 22 रन पर पहला विकेट गिरा। वह रन आउट हुई। विनीता के आउट होने के बाद पूजा बैटिंग हेतु आई पर कोई बैटसमैन बहुत ज्यादा स्कोर नहीं कर पाया।

कप्तान गुलशन को दो जीवनदान मिले और वह आखरी तक मैच में डटी रही। गुलशन ने कुल 37 रन बनाकर एक छोर संभालकर रखा। दिल्ली ने पहले 50 रन छटे ओवर में बनाए। उड़ीसा टीम की खूबी थी कि उन्होंने बहुत सधी हुई फील्डिंग कर रनों की गति पर लगाम लगाकर रखी। दो खिलाड़ी रन आउट हुई। मुख्य बालिंग रचना, पार्वती और मोमिना ने की। पार्वती ने 3 ओवर में 8 रन दिए। बी1 केटेगिरी की गेंदबाज मोमिना ने 1 ओवर में 7 रन देकर 1 विकेट लिया। दिल्ली की तरफ से सिर्फ 1 चौका लगा। टीम तनाव में थी कि कैसे इन अपनी उम्र से बहुत छोटी लड़कियों से कैसे खेले? यह बात बाद में कप्तान गुलशन ने स्वीकारी कि इन छोटी लड़कियों से हार कर समझ आया कि प्रैक्टिस बढ़ी चीज है.

मैच का मुख्य आर्कषण सधा क्षेत्ररक्षण था जिसकी बदौलत वह दिल्ली को रन बनाने में रोकने में कामयाब रही। उड़ीसा ने अपनी सधी रणनीति के बदौलत दिल्ली की कप्तान जिनका बल्ला कल के मैच में खूब चला था, उनको रन बनाने से रोकने में कामयाबी हासिल की। मैच का एक और आर्कषण रहा कि बी1 केटेगिरी की जमुना ने 3 ओवर में 28 रन देकर 1 विकेट लिया। यहां 3 ओवर का एक स्पैल होता है। यह बहुत ही सराहनीय प्रदर्शन है क्योंकि बी1 केटेगिरी के गेंदबाज अक्सर अपनी दिशा भटक जाया करते हैं। उड़ीसा की टीम ने पूरे अनुशासन में रहते हुए दिल्ली को रनों के लिए तरसाया और रनों की गति को आगे ना बढ़ने देकर पूरी टीम को 5 विकेट पर 132 रनों पर समेट लिया। दिल्ली की गेंदबाजी इतनी सधी थी कि 2 बल्लेबाज हिट विकेट हुए।

उड़ीसा की टीम मैदान पर 10 ओवर में इस स्कोर को पार करने की चुनौती देकर उतरी थी। अपनी पारी की पहली ही बाल पर पिछले दो मैचों की हीरो झिल्ली बरूआ ने चौका मारा। झिल्ली और बसंती की सलामी जोड़ी ने पहले ओवर में 4 चौके और 2 रनों के साथ कुल 18 रन बनाए। उड़ीसा ने अपने 50 रन तीन ओवर और 2 गेंदों पर बनाए। यह खिलाड़ी बहुत ही उत्साह में थे। इन दोनों की जोड़ी ने मैदान में चारों ओर जैसे रनों की झड़ी ही लगा दी। 4 ओवर की समाप्ति पर उड़ीसा का स्कोर 60 रन था। स्कोर पांच ओवर की समाप्ति पर बिना नुकसान के 75 था। जिस तरह से यह दोनों बल्लेबाज रन बनाकर अपने बल्लों को टकरा रहे थे वह दृश्य और भाव देखने लायक था। रनों का यह मुजरा और मुशायरा अपने आप में ही ऐसा नजारा था जो बार-बार नजर नहीं आता। 6 ओवर में 85 रन बिना किसी नुकसान के बने। उड़ीसा ने अपने 100 रन बिना किसी नुकसान के 7वें ओवर में बनाए। कल भी इसी जोड़ी ने अपने अर्धशतक पूरे किए थे। झिल्ली 48 रन पर हिटविकेट आउट हुई। पूजा के 9 वें ओवर में उड़ीसा ने चौका मारकर 9 विकेट से जीत हासिल की। इस टीम को देखकर लग रहा था कि यह मस्ती के लिए खेल रहे हैं। बैटसमैन के तौर पर इनके पास ना तो कुछ खोने के लिए है और ना कुछ पाने के लिए है। यह तो बस सिर्फ क्रिकेट के इस आंनदोत्सव में अपने हिस्से के सबसे खुबसूरत अपनी पीली जर्सी के उड़िया रंग भर रहे थे।

आज के मैच की प्लेयर आफ द मैच बसंती रहीं जिसने नॉट आउट 55 रन बनाये, जबकि बी1 केटेगिरी में विनीता मैच आफ द प्लेयर बनी, जिन्होंने 16 गेंदों में 22 रन बनाए। इस टूर्नामेंट के मैन आफ द सीरिज उड़ीसा की ही बसंती और बी1 श्रेणी में गायत्री रहीं। मैच के अंत में दोनों टीमों ने आपस में गले मिलकर एक दूसरे का अभिवादन किया। बाद में पूरी उड़िया टीम मैदान पर अपनी स्थानीय धुनों पर थिरकती नजर आई।

आज के मुख्य अतिथि विधायक विकासनगर मुन्ना सिंह चैहान जो हमेशा दिव्यांगों के कार्यक्रम में मौजूद रहते हैं, ने कहा कि मैं इस आयोजन में आकर इन सुंदर, प्रतिभाशाली और उत्साही लड़कियों से मिलकर अभिभूत हूं। मेरे पास आज शब्दों की कमी है कि क्या बोलूं। सुधामूर्ति इन्फोसिस के चैयरमेन की लिखी किताब थ्री थाउजेंड स्टिचिस का उल्लेखकर उन्होंने कहा कि मैं आज इस किताब की लाईनों को यहां साकार होता देख रहा हूं। यह बच्चे किसी पर भार नहीं हैं। यह बच्चे समाज की संपति हैं। यह समाज में योगदान करने वाले उत्पादक बच्चे हैं। यदि हम शास्त्रों में विश्वास करें तो उसमें दिव्य दृष्टि की बात कही गई है और आज मैं उस दिव्य दृष्टि को यहां मैदान पर इनको खेलते देखकर साकार होते देख रहा हूं। हममें से 90 फीसदी लोग तकनीकी को मास्टर के तौर पर प्रयोग करते हैं जो कि गलत है जबकि विज्ञान को एक अच्छे नौकर के तौर पर प्रयोग करना चाहिए। हमें तकनीकी का प्रयोग लोगों की जिंदगी को बदलने के लिए करना होगा। मैं दिल्ली की कप्तान गुलशन की इस बात से प्रभावित हूं कि जीवन में तकनीक बहुत महत्वपूर्ण है। हम हारे क्योंकि हमारी तकनीकी कमजोर थी। उन्होंने कहा कि कृपया मुझे एक ब्रीफ नोट दीजिए कि कैसे राज्य सरकार आपको सहयोग करे। ये बच्चे बेचारे नहीं हैं यह संपति हैं इनको सहयोग करने को। आज का दिन मेरे जीवन का सबसे बड़ा दिन है। मैं राजनैतिक व्यक्ति हूं पर कह सकता हूं कि यह सशक्तीकरण नहीं है। यह राष्ट्रीय एकता का सूत्र है। मैं आपको दिल से धन्यवाद करता हूं।

एक ब्रेकिंग न्यूज के तौर पर पता चला कि महिला ब्लांईड क्रिकेट में पहला अन्तर्राष्ट्रीय ब्लाईंड टूर्नामेंट पाकिस्तान और नेपाल के बीच पाकिस्तान के बीच नेपाल में खेला जाएगा। इस खबर का आज के टूर्नामेंट पर बड़ा असर होगा क्योंकि यहां से चयनित टीम में से ही राष्ट्रीय महिला ब्लांईड टीम का चयन होना है और वहीं से देश की टीम अन्तर्राष्ट्रीय मुकाबलों के लिए चुनी जाऐगी। यद्यपि यह ब्लांईड महिलाओं की क्रिकेट जरूर है पर शैलेन्द्र यादव का कहना था कि हम कोशिश करेंगे कि महिला ब्लांईड क्रिकेट को वही ऊंचाई मिले जो पुरूष क्रिकेट को मिला है।

युसर्क के प्रोफेसर दुर्गेश पंत ने कहा कि जीवन में सब कुछ विज्ञान ही है और क्रिकेट उस विज्ञान से अलग नहीं है। हम दृष्टि वालों को नई दृष्टि और नजरिया लेने की जरूरत है। आप देखो यह कितना शानदार उत्सव है। हम एक अच्छा माहौल देने की कोशिश कर हर फील्ड के लोगों को जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। हम एक वैज्ञानिक संस्थान हैं और विज्ञान तथा प्रौद्योगिकी किसी दूसरे ग्रह की बात नहीं है यह रोज मर्रे की बात है। रोज मर्रे की चीजों को सुंदरता से करना ही ज्ञान विज्ञान है। यह एक ईबादत है। मैं दिव्यांगों की इस ईबादत में अपनी पूरी टीम के साथ शिद्दत से खड़ा हूं। पिछले साल हमने पुरूषों का ब्लांईड टूर्नामेंट कराया था। हम अपने को धन्य मानते हैं कि हमें इस आयोजन का मौका मिला। मैं विजेता उड़ीसा, सहविजेता दिल्ली और उपविजेता उत्तराखंड को बधाई देता हूं। मैं इस काम को आगे ले जाने के लिए कृतसंकल्प हूं।

दिव्यांगों के विशेषज्ञ डा. कोचगबे ने समर्थनम की ओर से सभी आयोजकों का आभार प्रकट किया। क्रिकेट एसोशिएसन आफ ब्लाईंड शैलेन्द्र यादव ने बहुत सुंदर आयोजन और व्यवस्थाओं हेतु सबका आभार किया।

भाजपा नेत्री विनोद उनियाल ने कहा हम आप सबके यहां आने पर गदगद हो गये हैं। मुझे आपको देखकर बहुत नया अनुभव हमें मिला। आज बालिकाओं ने अपना परचम लहराया है किक्रेट में। आप दुबारा आयें बहुत ऊंचे खिलाड़ी बनकर। श्रीमती उनियाल ने कहा कि बच्चों का उत्साह देखकर बहुत खुशी हो रही है। इनको निरंतर प्रोत्साहन की जरूरत है। यहां दर्शकों की सीमित संख्या देखकर निराशा हुई। मेरा अनुरोध है कि इन बच्चों को प्रोत्साहन हेतु समाज के हर वर्ग को आगे आना चाहिए। मैं इनके उज्जवल भविष्य की कामना करती हूं।

यह टूर्नामेंट सर्मथनम ट्रस्ट, यूसर्क, टी.एच.डी.सी. और वेहलम ब्वाॅइज स्कूल देहरादून के द्वारा संयुक्त रूप से आयोजन किया गया। टूर्नामेंट के प्रथम, द्वितीय और तृतीय प्राईज भी अलग अलग स्पांसर द्वारा दिये गये।
तीनों टीमों के कप्तान और कोच का कहना है कि हमने देश में बहुत ज्यादा खेला है पर यहां जो इंतजाम है हमें आज तक कहीं नहीं मिला। यहां का खाना, प्रबधंन और समय पर सबकुछ बहुत ही प्रशंशनीय है। हम आयोजकों के आभारी हैं।

ग्लोकल स्कूल के बच्चों का कहना था कि आज के बाद हमारा नजरिया ब्लाइंड और अपने प्रति बदला है। इस खेल को देखकर हमें लगा कि जब यह आंखों के ना होने पर भी इतनी सुंदरता से खेल रहे हैं तो हमारे पास तो सब कुछ होते हुए भी हम तनाव में रहते हैं। आज के बाद हम तनावमुक्त रहने की कोशिश करेंगे। स्कूल के बच्चे यह मैच देखकर बहुत ही उत्साहित और उत्तेजित हैं। उनका कहना था कि अभी तक हमने खेल के माध्यम से लोगों को जुड़ते देखा है पर यहां तो हमने सबके दिलों को जुड़ते देखा है।

एम.के.पी. कालेज की पूर्व मनोविज्ञान विभाग की हैड डा. सरस्वती सिंह का कहना है कि मैं आज क्रिकेट को दिलो जान से आनंद उठा रही हूं। यह सामान्य क्रिकेट के मुकाबले ज्यादा रोमांच है क्योंकि यह अपनी सीमित क्षमताओं के बावजूद अपनी पूरी ताकत और इन्द्रियों का उपयोग कर रहे हैं। ऐसा सुंदर समन्वय कम देखने को मिलता है।

बजाज इंस्टीट्यूट के बच्चे जिस तरह से हवा में हाथों को लहराते हुए जिस तरक से साईलेंट क्लैप कर रहे थे वह देखने लायक था। बच्चों का उत्साह बढ़ाने को एन.आई.वी.एच. के नेशनल फुटबाल प्लेयर और एथलीट सीवन नेगी, अध्यापक संदीप कुमार, कृश्न यू टूयब चैनल चलाने वाले आंशिक ब्लाइंड कृश्न चंदर, स्टेट बैंक आफ इंडिया के राकेश तोमर, कौशल्या नेगी मौजूद थे।

दून ग्लोकल स्कूल सेलाकुई के बच्चे राकेश बिष्ट और कीर्तिका नेगी और बजाज इंस्टीट्यूट आॅफ लर्निंग के बच्चे अपनी अध्यापकाओं मनेन्द्र कौर, नीलू, अनीता, रवि, रजत और के साथ इन खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाने को मौजूद थे। दर्शकों में डा. सरस्वती सिंह, भाजपा की वरिष्ठ नेत्री श्रीमती विनोद उनियाल, डा. खन्ना, यूसर्क मीडिया रिपोर्टर कुसुम रावत, यूसर्क वैज्ञानिक डा. राजेन्द्र राणा, डा.भवतोष शर्मा, अनुराधा ध्यानी, ओम जोशी, राजदीप जंग, दिव्य पांडे, बीना काला, कमांडर ललित काला, ममता सिंघल, कर्नल उपेन्द्र सिंह, शीतल मिश्रा, आदि मौजूद थे। इसके अलावा टूर्नामेंट के स्पांसर अश्रेद्धय संस्था की एनी, स्ट्रेटिजिक मार्केटिंग देहरादून, साईं स्पर्श ट्रस्ट देहरादून, इनरव्हील क्लब देहरादून, डी.एन.ए. लैबस देहरादून, टी.एच.डी.सी., व्हेलम ब्वाईज स्कूल देहरादून, मेजर सुनीता यादव, ज्ञान असवाल, ललित सिंह, अब्दुल सलीम मौजूद थे।

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