अन्तर्राष्ट्रीय दिव्यांगजन दिवस 2018

संयुक्त राष्ट्र संघ के तत्वाधान में 1992 से पूरी दुनिया में 3 दिसंबर ‘अन्तर्राष्ट्रीय दिव्यांगजन दिवस’ के तौर पर मनाया जाता है। दिव्यांगजनों के सम्मान में 3 दिसंबर 2018 को उत्तराखंड विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान केंद्र- यूसर्क द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय दिव्यांगजन दिवस मनाया गया। यूसर्क एवं सर्मथनम ट्रस्ट फार दि डिसऐबलड बंगलूरू द्वारा संयुक्त रूप से यह दिवस बी.एफ.आई.टी. संस्थान में मनाया गया। इस वर्ष दिव्यांगजन दिवस की अंतर्राष्ट्रीय थीम इंपावरिंग द पर्सनस् विद डिसऐबिलिटीस एंड इनश्योरिंग इनक्लूसिवनैस एंड इक्वैलिटी- Empowering the persons with disabilities and insuring inclusiveness and equality है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विकासनगर के वैज्ञानिक विधायक मुन्ना सिंह चौहान थे।

कार्यक्रम की शुरूआत में यूसर्क निदेशक प्रोफेसर दुर्गेश पन्त ने कहा कि यह कार्यक्रम हमें दिव्यता के नजदीक लाता है। यूसर्क ने दिव्यांगजनों की संवेदनाओं और दिव्यता को गहराई से अहसास कर 2017 में दिव्यांग केंद्र की स्थापना की। हमारी कोशिश है कि हम इनके लिए गुणवत्तापरक विशेष शिक्षा खासतौर पर विज्ञान शिक्षा के मौके उपलब्ध कराकर उनके समावेशी विकास हेतु प्रयास कर सकें। हम दिव्यांजनों हेतु चलाई जा रही सरकारी योजनाओं, पहलों, विज्ञान और तकनीकी के उपलब्ध अनुप्रयोगों की जानकारी को गांव के आखरी दिव्यांगजन तक पहुंचाने हेतु प्रतिबध हैं, जिससे वह विज्ञान तकनीकी के इस युग में प्रौद्योगिकी की हर पहल का फायदा उठाकर सहजता का जीवन जी सकें। हमारी योजना आर.पी.डब्लू.डी. एक्ट 2016 के समस्त प्राविधानों पर उत्तराखंड में जागरूकता फैलाने की है। साथ ही हम इस क्षेत्र में काम करने वाले समस्त संस्थानों एवं विशेषज्ञों का एक साझा मंच तैयार करने हेतु प्रयत्नशील हैं। उन्होंने संस्थान के बच्चों को कहा कि वैज्ञानिक और तकनीकी छात्र होने के नाते आप एक ‘इनफोरमड मास’- informed मास हैं सो आपकी नैतिक जिम्मेदारी है कि आप इस मुहिम को आगे दुनिया के कोने-कोने में ले जाकर इस पर काम करने हेतु लोगों को प्रेरित करें।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि मुन्ना सिंह चौहान द्वारा यूसर्क की दिव्यांगजनों हेतु की जा रही इस मानवीय पहल को बहुत सराहा गया। साथ ही यूसर्क से अपेक्षा की गई कि दिव्यांगजनों हेतु हो रही हर वैज्ञानिक, सामाजिक व सरकारी कोशिश को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाए। उन्होने कहा कि हमारे वैज्ञानिकों को दिव्यांगता के मूल कारणों की खोज करके उसके निवारण हेतु आगे आना होगा जिससे किसी भी तरह की दिव्यांगता को जड़ से खत्म किया जा सके। श्री चौहान द्वारा जेनेटिक्स के क्षेत्र में काम करने वाली डा. सुजाता सिन्हा की वैज्ञानिक व तथ्यपरक प्रस्तुति को बहुत सराहा गया और यूसर्क से अपेक्षा की गई कि वह दिव्यांगता के जेनेटिक कारणों को बताने हेतु दूर-दराज के गांवों में डा. सुजाता सिन्हा की मदद से शिविर लगवाएं। उन्होंने कार्यक्रम में मौजूद संस्थान के 29 राज्यों, केंद्र शासित प्रदेश अंडमान निकोबार, चंडीगढ़ और अफगानिस्तान, नेपाल, भूटान, केन्या, बांग्लादेश के 700 छात्रों एवं अध्यापकों का आहवान किया कि आपको दिव्यांगजनों के चेहरे पर मुस्कराहट लाने हेतु ‘ब्रांड एंबेसडर’ की भूमिका निभानी होगी क्योंकि भगवान को किसी ने नहीं देखा। ये दिव्यांगजन ही ईश्वर की सुंदर कृति हैं। इनके लिए की गई हर पहल पर ईश्वर जरूर मुस्कराऐगा। आप अपनी वैज्ञानिक पहलों से दिव्यांगता को खत्म करने हेतु प्रयास करें। मुझे दुख होता है जब लोग इनको बेचारा कहते हैं। यह हमारी सहानुभूति के बजाय प्रेम और प्रोत्साहन के हकदार हैं। मेरी अपेक्षा है कि यूसर्क इनको एक जिम्मेदार नागरिक बनाने हेतु संवदेनशीलता से ठोस पहल करे।

कार्यक्रम की शुरूआत में दुनिया के मशहूर दिव्यांग व्यक्तियों- स्टीफन हाकिन्स, फ्रैंकलिन रूजवेल्ट, रैल्फ बा्रन, निक वुजिकिक जैसे लोगों की जीवनवृत्त पर डाक्यूमेंट्री दिखाई, जिन्होंने अपनी दिव्यांगता के बावजूद सफलतम जीवन जिया। समर्थनम ट्रस्ट के श्रृवण बाधित बच्चों ने साईन लैंग्वेज में राष्ट्रगान प्रस्तुत किया। छात्र विक्रम शर्मा द्वारा कत्थक नृत्य में सरस्वती वंदना की गई। साथ ही ‘लर्निंग ट्री स्कूल’ के दिव्यांग बच्चों ने देश भक्ति गीत पर मोहक प्रस्तुति कर सबकी वाहवाही लूटी। कार्यक्रम में समर्थनम ट्रस्ट की अंजली अग्रवाल ने बताया कि आज 15 प्रतिशत जनसंख्या किसी ना किसी तरह से दिव्यांग है। उन्होंने समर्थनम ट्रस्ट के उत्तराखंड चैप्टर के कामों और यूसर्क के साथ समन्वय में हो रहे कामों पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम में जिनोमिक्स एंड पब्लिक हैल्थ फांउडेशन की डा. सुजाता सिन्हा ने जेनेटिक्स एंड डिसऐबिलिटी पर रोचक वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित जानकारियां देकर दिव्यांगता के वैज्ञानिक कारणों पर प्रकाश डाला। उन्होंने दिव्यांगता में जैनेटिक्स की भूमिका पर स्लाईड शो के द्वारा बताया कि जन्म से हुई अधिकांश दिव्यांगता का कारण जीन में विकृति है। उन्होंने बताया कि लगभग 6000 तरह के एकल जीन डिसआर्डर हैं जिनमें से 200 से अधिक रोगों के बारे में विस्तृत जानकारी है, जिनको समाज में सही तरीके से बाँटने पर इनको रोका जा सकता है, इसलिए हमें संवेदनशीलता से इस मुददे पर जागरूकता हेतु पहल करनी होगी।

उत्तराखंड देश में पहला राज्य है जहां नेशनल हैल्थ मिशन के अन्तर्गत थैलेसीमिया स्क्रीनिंग और केयर पर सबसे पहले काम हुआ। हम इसे रोकने हेतु प्रयास कर रहे हैं। यह ग्लोबिन जीन में विकृति की कमी से होता है। उन्होंने बताया कि कैसे नवीनतम जीन टैक्नोलोजी का प्रयोग करके जेनैटिक डिसआर्डर को रोका जा सकता है। धन्यवाद ज्ञापन संस्थान के चैयरमैन भूपेंद्र अरोड़ा ने दिया।

कार्यक्रम में यूसर्क वैज्ञानिक डा. ओ.पी.नौटियाल, अनुराधा ध्यानी, कुसुम रावत सहित बी.एफ.आई.टी. के चैयरमैन, प्रधानाचार्य, परीक्षा नियंत्रक डॉ. रावत सहित सहित कई गणमान्य व्यक्ति मौजूद थे। कार्यक्रम का संचालन संस्थान के छात्रों मुब्बसिर और प्रियंका ने किया।

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